My Poems

बिहार की आवाज़

बिहार की आवाज़ आइए, हवा का रुख बदल दें कल ट्रेन भर – भर कर जाती थीं आज ट्रेन भर – भर कर आयी हैं और कल ट्रेन भर – भर कर जाएँगी पर उनमें अब लोग न होंगे होंगी केवल ज्ञान की पोटरियाँ अन्न, फल और सब्जियाँ अंडे, वस्त्र और मछलियाँ आइए, हवा का […]

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चर्मकार

हम चर्मकार हैं , दुनिया का दुःख दर्द मिटाते रहते हैं।                                          हम कर्मकार हैं , व्यर्थों में भी अर्थ ढूँढते रहते हैं तुम तो नर को कंधा देकर नामों निशाँ मिटा देतेपशुओं को कंधा दे […]

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सृजनवादी गीत

हम शिक्षु हैं सृजनवाद के हमें सदा ही बढ़ना है नई सोच और नई दिशाएँ हर दिन नित पल गढ़ना है देख के चीजें आस-पास की, हम इसकी पहचान करें क्या होता है, कैसे क्या हो, इसका हम अनुमान करें। उत्तर देते आये अब तक , प्रश्न हमें अब करना है। हम शिक्षु ————————————————– कण-कण […]

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