बिहार की आवाज़

बिहार की आवाज़ आइए, हवा का रुख बदल दें कल ट्रेन भर – भर कर जाती थीं आज ट्रेन भर – भर कर आयी हैं और कल ट्रेन भर – भर कर जाएँगी पर उनमें अब लोग न होंगे होंगी केवल ज्ञान की पोटरियाँ अन्न, फल और सब्जियाँ अंडे, वस्त्र और मछलियाँ आइए, हवा का […]

चर्मकार

हम चर्मकार हैं , दुनिया का दुःख दर्द मिटाते रहते हैं।                                          हम कर्मकार हैं , व्यर्थों में भी अर्थ ढूँढते रहते हैं तुम तो नर को कंधा देकर नामों निशाँ मिटा देतेपशुओं को कंधा दे […]