बिहार की आवाज़

बिहार की आवाज़ आइए, हवा का रुख बदल दें कल ट्रेन भर – भर कर जाती थीं आज ट्रेन भर – भर कर आयी हैं और कल ट्रेन भर – भर कर जाएँगी पर उनमें अब लोग न होंगे होंगी केवल ज्ञान की पोटरियाँ अन्न, फल और सब्जियाँ अंडे, वस्त्र और मछलियाँ आइए, हवा का […]

बिहार की आवाज़

बिहार की आवाज़ आइए, हवा का रुख बदल दें कल ट्रेन भर – भर कर जाती थीं आज ट्रेन भर – भर कर आयी हैं और कल ट्रेन भर – भर कर जाएँगी पर उनमें अब लोग न होंगे होंगी केवल ज्ञान की पोटरियाँ अन्न, फल और सब्जियाँ अंडे, वस्त्र और मछलियाँ आइए, हवा का […]

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सृजनवादी गीत

हम शिक्षु हैं सृजनवाद के हमें सदा ही बढ़ना है नई सोच और नई दिशाएँ हर दिन नित पल गढ़ना है देख के चीजें आस-पास की, हम इसकी पहचान करें क्या होता है, कैसे क्या हो, इसका हम अनुमान करें। उत्तर देते आये अब तक , प्रश्न हमें अब करना है। हम शिक्षु ————————————————– कण-कण […]

सूर्य को अर्घ्य

– चार दिनों के कठोर तप के बाद गंगा के पानी में खड़ा होकर माँ ने छठ घाट पर सबको जब सूर्यदेव को अर्घ्य देने को कहा तो आधुनिक विज्ञान पढ़नेवाला ईश्वर विरोधी बच्चा चिल्लाया ‘नहीं देता अर्घ्य’ । उसने चुनौती के अंदाज में कहा हे सूर्यदेव, बताओ तुम्हें देव क्यों कहूँ ? क्यों करूँ […]

सृजनगीत गाएँ

सृजनगीत गाएँ सृजनगीत गाएँ नव वर्ष में हम सृजनगीत गाएँ । हर क्षण नया हो हर पल नया हो सब कोई यहाँ तो सृजन कर रहा हो सृजन की तो ऐसी धारा बहाएँ सृजनगीत गाएँ सृजनगीत गाएँ। हरेक व्यक्ति शिक्षु हरेक व्यक्ति शिक्षक लर्निंग समाज सृजनता का पोषक अब ऐसा समाज बना के दिखाएँ सृजनगीत […]